हक़फ़त्ह-याबमेरेख़ुदाक्यूँँनहींहुआ
तूनेकहाथातेराकहाक्यूँँनहींहुआ
जबहश्रइसीज़मींपेउठाएगएतोफिर
बरपायहींपेरोज़-ए-जज़ाक्यूँँनहींहुआ
वोशम्अबुझगईथीतोकोहरामथातमाम
दिलबुझगएतोशोर-ए-अज़ाक्यूँँनहींहुआ
वामाँदगाँपेतंगहुईक्यूँँतेरीज़मीं
दरवाज़ाआसमानकावाक्यूँँनहींहुआ
वोशोला-साज़भीइसीबस्तीकेलोगथे
उनकीगलीमेंरक़्स-ए-हवाक्यूँँनहींहुआ
आख़िरइसीख़राबेमेंज़िंदाहैंऔरसब
यूँँख़ाककोईमेरेसिवाक्यूँँनहींहुआ
क्याजज़्ब-ए-इश्क़मुझसेज़ियादाथाग़ैरमें
उसकाहबीबउससेजुदाक्यूँँनहींहुआ
जबवोभीथेगुलू-ए-बुरीदासनाला-ज़न
फिरकुश्तगाँकाहर्फ़रसाक्यूँँनहींहुआ
करतारहामैंतेरेलिएदोस्तोंसेजंग
तूमेरेदुश्मनोंसेख़फ़ाक्यूँँनहींहुआ
जोकुछहुआवोकैसेहुआजानताहूँमैं
जोकुछनहींहुआवोबताक्यूँँनहींहुआ