शम्अ-ए-तन्हा की तरह सुब्ह के तारे जैसे

  - Irfan Siddiqi
शम्अ-ए-तन्हाकीतरहसुब्हकेतारेजैसे
शहरमेंएकहीदोहोंगेहमारेजैसे
छूगयाथाकभीइसजिस्मकोइकशोला-ए-दर्द
आजतकख़ाकसेउड़तेहैंशरारेजैसे
हौसलेदेताहैयेअब्र-ए-गुरेज़ाँक्याक्या
ज़िंदाहूँदश्तमेंहमउसकेसहारेजैसे
सख़्त-जाँहमसाकोईतुमनेदेखाहोगा
हमनेक़ातिलकईदेखेहैंतुम्हारेजैसे
दीदनीहैमुझेसीनेसेलगानाउसका
अपनेशानोंसेकोईबोझउतारेजैसे
अबजोचमकाहैयेख़ंजरतोख़यालआताहै
तुझकोदेखाहोकभीनहरकिनारेजैसे
उसकीआँखेंहैंकिइकडूबनेवालाइंसाँ
दूसरेडूबनेवालेकोपुकारेजैसे
  - Irfan Siddiqi
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