tarah tarah ke fasaane sunaane lagti hai | तरह तरह के फ़साने सुनाने लगती है

  - Ehtisham ul Haq Siddiqui
तरहतरहकेफ़सानेसुनानेलगतीहै
उड़ूँतोमेरीज़मींछटपटानेलगतीहै
ग़ुरूर-ए-नस्लहैयक-लख़्ततोजाएगा
किलगतेलगतेयेदौलतठिकानेलगतीहै
जानेकैसीहवाहैकिरातहोतेही
बदनमेंकेमिरेख़ाकउड़ानेलगतीहै
मैंअपनीप्यासपेजबसब्रबाँधदेताहूँ
तोजोनदीभीमिलेआज़मानेलगतीहै
जहाँजहाँभीमैंउससेगुरेज़करताहूँ
वहींवहींसेवोआवाज़आनेलगतीहै
ख़यालतकभीअगरउसकानामजाए
वोहाथचुपकेसेमेरादबानेलगतीहै
वोएकख़ुशबूहैआतीनहींनज़रलेकिन
क़रीबआतेहीख़ुदकोबतानेलगतीहै
  - Ehtisham ul Haq Siddiqui
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