koi taaza ho ki ho koi puraani chahiye | कोई ताज़ा हो कि हो कोई पुरानी चाहिए

  - Ehtisham ul Haq Siddiqui
कोईताज़ाहोकिहोकोईपुरानीचाहिए
वक़्तकोआगेबढ़ानाहैकहानीचाहिए
तूमिरीदहलीज़परकरठहरजाताहैक्यूँ
तूतोदरियाहैतुझेतोबसरवानीचाहिए
हाथमेंजिसकेभीदेखोआगकाकश्कोलहै
औरहरइककश्कोलकोकुछबूँदपानीचाहिए
ज़िंदगीऔरमौतदोनोंमेंहैइकरंग-ए-करम
तुमबताओतुमकोकिसकीमेहरबानीचाहिए
दिलसेमतलबहैतिरेपैकरसेमुझकोक्याग़रज़
हुक्मरानीकोमुझेइकराजधानीचाहिए
  - Ehtisham ul Haq Siddiqui
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