kabhi hawa ne kabhi udte pattharon ne kiya | कभी हवा ने कभी उड़ते पत्थरों ने किया

  - Chandra Parkash Shad
कभीहवानेकभीउड़तेपत्थरोंनेकिया
हमेंतोनश्रअजबसीवज़ाहतोंनेकिया
तमाममंज़र-ए-शबढेरहोगयादिलपर
येक्यासितममिरेक़दमोंकीआहटोंनेकिया
हरएकचीज़लगीटूटतीसीबाहरकी
किजोकियामिरेअंदरकेमंज़रोंनेकिया
खुलीआँखकभीएकपलकोसहराकी
अगरचेशोरबहुतउड़तीबस्तियोंनेकिया
उधरतोकुछथायूँँहीवोआतेजातेरहे
अजबमज़ाक़सफ़रसेमुसाफ़िरोंनेकिया
मैंअपनेआपसेडरनेलगाभरेघरमें
येमुझसेकियामिरेअपनेहीआइनोंनेकिया
कईतरहसेघटायाबढ़ायासायोंको
मकाँमकाँपेयहीकामसूरजोंनेकिया
  - Chandra Parkash Shad
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