pichhle safar ka aks-e-ziyaan mere saamne | पिछले सफ़र का अक्स-ए-ज़ियाँ मेरे सामने

  - Chandra Parkash Shad
पिछलेसफ़रकाअक्स-ए-ज़ियाँमेरेसामने
सबबस्तियाँधुआँहीधुआँमेरेसामने
किसख़ित्ता-ए-तलबमेंअचानकपड़ेथेपाँव
उमडाहुआथादश्त-ए-गुमाँमेरेसामने
झोंकासाबीतजाऊँकिदीवारसारुकूँ
इकपड़ीहैजा-ए-अमाँमेरेसामने
शहर-ए-सदापेहैकोईपर्दापड़ाहुआ
कोईगलीकोईमकाँमेरेसामने
इसपरभीक्यासबबहैकिउठतेनहींक़दम
जंगलकोईकोह-ए-गिराँमेरेसामने
देखोतोआबजूसीजोछूलूँतोधूलख़ाक
क्याशयहैमिस्ल-ए-रेग-ए-रवाँमेरेसामने
जिसकेसबबरहाहदफ़-ए-रोज़-ओ-शबहीमैं
टूटीहैउसउफ़ुक़कीकमाँमेरेसामने
  - Chandra Parkash Shad
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