khada tha kaun kahaan kuchh pata chala hi nahin | खड़ा था कौन कहाँ कुछ पता चला ही नहीं

  - Badiuzzaman Khawar
खड़ाथाकौनकहाँकुछपताचलाहीनहीं
मैंरास्तेमेंकिसीमोड़पररुकाहीनहीं
हवाएँतेज़थींइतनीकिएकदिलकेसिवा
कोईचराग़सर-ए-रहगुज़रजलाहीनहीं
कहाँसेख़ंजर-ओ-शमशीरआज़मातामैं
मिरेअदूसेमिरासामनाहुआहीनहीं
दुखोंकीआगमेंहरशख़्सजलकेराखहुआ
किसीग़रीबकेदिलसेधुआँउठाहीनहीं
हमाराशहर-ए-तमन्नाबहुतहसींथामगर
उजड़केरहगयाऐसाकिफिरबसाहीनहीं
वोबनगयामिरानाक़िदपतानहींक्यूँँकर
मिराकलामतोउसनेकभीपढ़ाहीनहीं
मैंअपनेदौरकीआवाज़थामगर'ख़ावर'
किसीनेबज़्म-ए-जहाँमेंमुझेसुनाहीनहीं
  - Badiuzzaman Khawar
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