mehsoos ho raha hai jo gham meri zaat ka | महसूस हो रहा है जो ग़म मेरी ज़ात का

  - Badiuzzaman Khawar
महसूसहोरहाहैजोग़ममेरीज़ातका
सचपूछिएतोदर्दहैवोकाएनातका
घरकीघुटनसेदूरनिकलजाएआदमी
सड़कोंपेख़ौफ़होअगरहादसातका
अपनेबदनकोऔरथकाओदोस्तो
ढलजाएदिनतोबोझउठानाहैरातका
इकदूसरेकोज़हरपिलातेहैंलोगअब
बातोंमेंशहदघोलकेक़ंद-ओ-नबातका
हरशख़्सतेरेशहरमेंमुजरिमबनाहुआ
फिरताहैढूँढताहुआरिश्तानजातका
इसमेंकिसीकाअक्सचेहरादिखाईदे
धुँदलागयाहैआइना'ख़ावर'हयातका
  - Badiuzzaman Khawar
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