kab biyaabaan raah men aaya ye samjha hi nahin | कब बयाबाँ राह में आया ये समझा ही नहीं

  - Badiuzzaman Khawar
कबबयाबाँराहमेंआयायेसमझाहीनहीं
चलतेरहनेकेसिवाध्यानऔरकुछथाहीनहीं
कर्ब-ए-मंज़िलकाहोक्याएहसासइनअश्जारको
जिनकेसाएमेंमुसाफ़िरकोईठहराहीनहीं
किसकोबतलातेकिआएहैंकहाँसेकौनहैं
हमफ़क़ीरोंकाकिसीनेहालपूछाहीनहीं
क्यातलबकरताकिसीसेज़िंदगीकाख़ूँ-बहा
मुजरिमोंमेंमेराक़ातिलकोईनिकलाहीनहीं
बे-तहाशाप्यारकीदौलतलुटाईउम्रभर
दोस्तीकाहमनेकुछअंजामसोचाहीनहीं
घूमतापायागयाथाशहरमेंवोएकदिन
फिरकिसीनेतेरेदीवानेकोदेखाहीनहीं
दोस्तो'ख़ावर'सुनाएक्यातुम्हेंताज़ाग़ज़ल
मुद्दतोंसेउसनेकोईशे'रलिक्खाहीनहीं
  - Badiuzzaman Khawar
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