hai bahut mushkil nikalna shahar ke bazaar men | है बहुत मुश्किल निकलना शहर के बाज़ार में

  - Badiuzzaman Khawar
हैबहुतमुश्किलनिकलनाशहरकेबाज़ारमें
जबसेजकड़ाहूँमैंकमरेकेदर-ओ-दीवारमें
छेबरसकेबा'दइकसूनेमकाँकेबाम-ओ-दर
बसगएहैंफिरकिसीकेजिस्मकीमहकारमें
मुझकोअपनेजिस्मसेबाहरनिकलनाचाहिए
वर्नामेरादमघुटेगाइसअँधेरेग़ारमें
यादउसेइकपलभीकरनेकीमुझेफ़ुर्सतनहीं
मुब्तलासदियोंसेमेरादिलहैजिसकेप्यारमें
देखतेहैंलोगजब'ख़ावर'पुरानीआँखसे
क्यानज़रआएकोईख़ूबीनएफ़नकारमें
  - Badiuzzaman Khawar
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