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Fahmi Badayuni
bas ye diqqat hai bhulaane men use
bas ye diqqat hai bhulaane men use | बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे
- Fahmi Badayuni
बस
ये
दिक़्क़त
है
भुलाने
में
उसे
उसके
बदले
में
किस
को
याद
करें
- Fahmi Badayuni
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ज़रा
सी
देर
आँखों
में
चली
जाए
तुम्हारी
याद
बहुत
दिन
हो
गए
दिल
का
मुझे
झाड़ू
लगाना
है
Tanoj Dadhich
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नहीं
आती
तो
याद
उनकी
महीनों
तक
नहीं
आती
मगर
जब
याद
आते
हैं
तो
अक्सर
याद
आते
हैं
Hasrat Mohani
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जबकि
मैंने
इश्क़
में
मरने
का
वा'दा
कर
लिया
तब
लगा
मुझको
कि
मैंने
इश्क़
ज़्यादा
कर
लिया
Siddharth Saaz
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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दिल
आबाद
कहाँ
रह
पाए
उस
की
याद
भुला
देने
से
कमरा
वीराँ
हो
जाता
है
इक
तस्वीर
हटा
देने
से
Jaleel 'Aali'
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सुबूत
है
ये
मोहब्बत
की
सादा-लौही
का
जब
उस
ने
वा'दा
किया
हम
ने
ए'तिबार
Josh Malihabadi
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
Salman Zafar
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हम
भूल
सके
हैं
न
तुझे
भूल
सकेंगे
तू
याद
रहेगा
हमें
हाँ
याद
रहेगा
Ibn E Insha
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बहुत
दुश्वार
है
रस्ता
हमारा
नहीं
कर
पाओगे
पीछा
हमारा
रुला
देगा
उसे
हँसना
हमारा
उसे
मा'लूम
है
क़िस्सा
हमारा
तसल्ली
दे
रहे
हैं
चारा-गर
को
समझ
लो
हाल
है
कैसा
हमारा
तुम्हारी
कॉपी
ने
ख़ाली
कराया
किताबों
से
भरा
बस्ता
हमारा
बिछड़ने
वाला
मुड़
कर
देख
लेता
तो
हम
को
घर
तो
मिल
जाता
हमारा
ख़ुदा
हाफ़िज़
अगर
तुम
कह
के
जाते
तो
कुछ
दिन
काम
चल
जाता
हमारा
बटन
बस
शर्ट
में
इक
टाँक
देते
तो
सब
ग़ुस्सा
उतर
जाता
हमारा
चलो
साझे
में
बज़्म-ए-दिल
सजाएँ
सजावट
आप
की
ख़र्चा
हमारा
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Fahmi Badayuni
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ख़ुशी
से
काँप
रही
थीं
ये
उँगलियाँ
इतनी
डिलीट
हो
गया
इक
शख़्स
सेव
करने
में
Fahmi Badayuni
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ख़त
लिफ़ाफ़े
में
ग़ैर
का
निकला
उस
का
क़ासिद
भी
बे-वफ़ा
निकला
जान
में
जान
आ
गई
यारो
वो
किसी
और
से
ख़फ़ा
निकला
शे'र
नाज़िम
ने
जब
पढ़ा
मेरा
पहला
मिस्रा
ही
दूसरा
निकला
फिर
उसी
क़ब्र
के
बराबर
से
ज़िंदा
रहने
का
रास्ता
निकला
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Fahmi Badayuni
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तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
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घर
बनाना
बहोत
ज़रूरी
है
क़ैदखाना
बहोत
ज़रूरी
है
फूल
खिलने
से
फल
उतरते
हैं
मुस्कुराना
बहोत
ज़रूरी
है
महफिलें
बे-सबब
नहीं
जमती
एक
फसाना
बहोत
ज़रूरी
है
अब
के
दरवाज़ा
ख़ुद
सजाया
है
तेरा
आना
बहोत
ज़रूरी
है
आ
समाँ
में
ज़मीन
वालो
का
इक
ठिकाना
बहोत
ज़रूरी
है
अब
के
वो
बे-सबब
ही
रूठा
है
अब
मनाना
बहोत
ज़रूरी
है
कितने
ज़िंदा
हैं
हम,
पता
तो
चला
ज़हर
खाना
बहोत
ज़रूरी
है
सर
उठाने
के
वास्ते
"फ़हमी"
सर
झुकाना
बहुत
ज़रूरी
है
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Fahmi Badayuni
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