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Fahmi Badayuni
khushi se kaanp rahi theen ye ungaliyaan itni
khushi se kaanp rahi theen ye ungaliyaan itni | ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी
- Fahmi Badayuni
ख़ुशी
से
काँप
रही
थीं
ये
उँगलियाँ
इतनी
डिलीट
हो
गया
इक
शख़्स
सेव
करने
में
- Fahmi Badayuni
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मुझ
में
अब
मैं
नहीं
रही
बाक़ी
मैं
ने
चाहा
है
इस
क़दर
तुम
को
Ambreen Haseeb Ambar
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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ज़रा
मोहतात
होना
चाहिए
था
बग़ैर
अश्कों
के
रोना
चाहिए
था
अब
उन
को
याद
कर
के
रो
रहे
हैं
बिछड़ते
वक़्त
रोना
चाहिए
था
मिरी
वादा-ख़िलाफ़ी
पर
वो
चुप
है
उसे
नाराज़
होना
चाहिए
था
चला
आता
यक़ीनन
ख़्वाब
में
वो
हमें
कल
रात
सोना
चाहिए
था
सुई
धागा
मोहब्बत
ने
दिया
था
तो
कुछ
सीना
पिरोना
चाहिए
था
हमारा
हाल
तुम
भी
पूछते
हो
तुम्हें
मालूम
होना
चाहिए
था
वफ़ा
मजबूर
तुम
को
कर
रही
थी
तो
फिर
मजबूर
होना
चाहिए
था
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Fahmi Badayuni
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पूछ
लेते
वो
बस
मिज़ाज
मिरा
कितना
आसान
था
इलाज
मिरा
चारा-गर
की
नज़र
बताती
है
हाल
अच्छा
नहीं
है
आज
मिरा
मैं
तो
रहता
हूँ
दश्त
में
मसरूफ़
क़ैस
करता
है
काम-काज
मिरा
कोई
कासा
मदद
को
भेज
अल्लाह
मेरे
बस
में
नहीं
है
ताज
मिरा
मैं
मोहब्बत
की
बादशाहत
हूँ
मुझ
पे
चलता
नहीं
है
राज
मिरा
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Fahmi Badayuni
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चारासाज़ों
के
बस
की
बात
नहीं
मैं
दवाओं
के
बस
की
बात
नहीं
चाहता
हूँ
मैं
दीमकों
से
नजात
जो
किताबों
के
बस
की
बात
नहीं
तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
ख़त्म
कर
दे
अज़ाब
क़ब्रों
का
ताजमहलों
के
बस
की
बात
नहीं
आँसुओं
में
जो
झिलमिलाहट
है
वो
सितारों
के
बस
की
बात
नहीं
ऐसा
लगता
है
अब
तेरा
दीदार
सिर्फ़
आँखों
के
बस
की
बात
नहीं
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Fahmi Badayuni
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उसे
ले
कर
जो
गाड़ी
जा
चुकी
है
मैं
शायद
उस
के
नीचे
आ
रहा
हूँ
Fahmi Badayuni
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सहराओं
ने
माँगा
पानी
दरियाओं
पर
बरसा
पानी
बुनियादें
कमज़ोर
नहीं
थीं
दीवारों
से
आया
पानी
आख़िर
किस
किस
नीम
की
जड़
में
कब
तक
डालें
मीठा
पानी
छत
का
हाल
बता
देता
है
परनाले
से
गिरता
पानी
फ़िक्र-ओ-मसाइल
याद-ए-जानाँ
गर्म
हवाएँ
ठंडा
पानी
प्यासे
बच्चे
खेल
रहे
हैं
मछली
मछली
कितना
पानी
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Fahmi Badayuni
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