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anupam shah
kuchh isliye bhi jhagrata sa raha tumse main
kuchh isliye bhi jhagrata sa raha tumse main | कुछ इसलिए भी झगड़ता सा रहा तुम सेे मैं
- anupam shah
कुछ
इसलिए
भी
झगड़ता
सा
रहा
तुम
सेे
मैं
हर
एक
शख़्स
मुक़द्दर
से
नहीं
लड़
सकता
- anupam shah
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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मैं
ख़ुद
भी
यार
तुझे
भूलने
के
हक़
में
हूँ
मगर
जो
बीच
में
कम-बख़्त
शा'इरी
है
ना
Afzal Khan
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मेरी
क़िस्मत
कि
ये
दुनिया
मुझे
पहचानती
है
लोग
मर
जाते
हैं
पहचान
बनाने
के
लिए
Nadeem Farrukh
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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किताब-ए-मुक़द्दर
में
रांझा
दिवाना
मगर
हीर
बेहद
सयानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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अपनी
कि़स्मत
में
ही
जब
इश्क़
नहीं
है
यारो
किसलिए
अश्क-ए-लहू
इश्क़
में
जाया
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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गर
ये
अच्छी
क़िस्मत
है
तो
लानत
ऐसी
क़िस्मत
पर
अपने
फोन
में
देख
रहे
हैं,
बाप
को
बूढ़ा
होते
हम
Siddharth Saaz
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मिलना
था
इत्तिफ़ाक़
बिछड़ना
नसीब
था
वो
उतनी
दूर
हो
गया
जितना
क़रीब
था
Anjum Rehbar
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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इश्क़
का
ज़ख़्म
ताज़ा
हरा
कर
लिया
एक
इल्ज़ाम
था
हमने
जो
सर
लिया
हमने
सोचा
नहीं
इश्क़
में
फिर
नफ़ा
राह
में
जो
मिला
बाँह
में
भर
लिया
आप
पिघले
नहीं
देखकर
अश्क़
ये
एक
पत्थर
को
हमने
सनम
कर
लिया
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anupam shah
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तुम्हारे
कान
के
झुमके
से
मुझको
रश्क़
ऐसे
है
कभी
गर्दन
को
छूता
है
कभी
गालों
को
चू
में
है
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anupam shah
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जाने
का
जो
ग़म
होता
है
तेज
कभी
मद्धम
होता
है
तुम
सेे
बिछड़कर
जाना
हमने
आँख
का
आँसू
नम
होता
है
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anupam shah
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बहुत
कुछ
खो
दिया
है
तब
कहीं
अब
ख़ुद
को
पाया
है
मिरी
जाँ
इश्क़
हो
या
दुश्मनी
अब
मैं
न
बदलूँगा
anupam shah
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यार
पैसा
तो
हमने
कमाया
बहुत
और
पानी
के
जैसे
बहाएा
बहुत
एक
वा'दा
किया
साथ
में
साथ
का
एकतरफ़ा
ही
उसको
निभाया
बहुत
मयकशी
ही
तो
थी
उम्र
भर
को
रही
आपने
तो
उसे
भी
छुड़ाया
बहुत
ऐ
ख़ुदा
पास
आकर
के
होना
ज़ुदा
दर्द
होता
है
हमको
ख़ुदाया
बहुत
एक
उम्मीद
पर
जी
गए
ज़िंदगी
एक
उम्मीद
ने
दिल
दुखाया
बहुत
रौशनी
जिनके
होते
हुई
थी
कभी
उन
दियों
ने
हमें
फिर
जलाया
बहुत
रहगुज़र
था
मेरा
राह
में
रह
गया
ऐसे
वैसों
से
तूने
मिलाया
बहुत
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anupam shah
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