hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
anupam shah
ishq ka zakhm taza haraa kar liya
ishq ka zakhm taza haraa kar liya | इश्क़ का ज़ख़्म ताज़ा हरा कर लिया
- anupam shah
इश्क़
का
ज़ख़्म
ताज़ा
हरा
कर
लिया
एक
इल्ज़ाम
था
हमने
जो
सर
लिया
हमने
सोचा
नहीं
इश्क़
में
फिर
नफ़ा
राह
में
जो
मिला
बाँह
में
भर
लिया
आप
पिघले
नहीं
देखकर
अश्क़
ये
एक
पत्थर
को
हमने
सनम
कर
लिया
- anupam shah
Download Ghazal Image
है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
Send
Download Image
4 Likes
सारी
दुनिया
के
ग़म
हमारे
हैं
और
सितम
ये
कि
हम
तुम्हारे
हैं
Jaun Elia
Send
Download Image
47 Likes
एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
Read Full
Zia Mazkoor
Send
Download Image
92 Likes
हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
Send
Download Image
38 Likes
सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
Send
Download Image
22 Likes
तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
Send
Download Image
36 Likes
यूँँ
न
क़ातिल
को
जब
यक़ीं
आया
हम
ने
दिल
खोल
कर
दिखाई
चोट
Fani Badayuni
Send
Download Image
25 Likes
गीत
लिक्खे
भी
तो
ऐसे
के
सुनाएँ
न
गए
ज़ख़्म
यूँँ
लफ़्ज़ों
में
उतरे
के
दिखाएँ
न
गए
आज
तक
रक्खे
हैं
पछतावे
की
अलमारी
में
एक
दो
वादे
जो
दोनों
से
निभाएँ
न
गए
Read Full
Farhat Abbas Shah
Send
Download Image
62 Likes
जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
Send
Download Image
17 Likes
ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
Send
Download Image
30 Likes
Read More
कहाँ
इक
दौर
था
मिलकर
तुम्हें
सब
भूल
जाते
थे
अभी
इक
दौर
है
भूलें
तुम्हें
तो
और
कुछ
देखें
anupam shah
Send
Download Image
3 Likes
पुरानी
बात
पर
कब
तक
नए
क़िस्से
बिगाड़ोगे
समर
न
दे
सका
तो
क्या
दरख़्तों
को
जला
दोगे
anupam shah
Send
Download Image
5 Likes
तुम्हारे
वासते
जो
अब
नहीं
क़ाबिल
रहा
हूँ
मैं
उन्हें
पूछो
ज़रा
जिनके
लिए
मुश्किल
रहा
हूँ
मैं
भटकता
फिर
रहा
हूँ
बाद
तेरे
इस
तरह
से
मैं
कभी
दरया
कभी
कश्ती
कभी
साहिल
रहा
हूँ
मैं
Read Full
anupam shah
Send
Download Image
4 Likes
मैं
अर्से
बाद
इतनी
कश्मकश
में
फिर
से
गुज़रा
हूँ
कि
तेरी
इन्तिज़ारी
है
औ
तन्हा
भी
बहुत
ख़ुश
हूँ
anupam shah
Send
Download Image
3 Likes
उसे
तोहफ़े
में
दी
थी
बालियां
दो
किताबें
बेच
आया
था
दुकाँ
पे
anupam shah
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Bebas Shayari
Nazakat Shayari
Nazar Shayari
Mashwara Shayari
Allahabad Shayari