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anupam shah
puraani baat par kab tak naye qisse bigaaroge
puraani baat par kab tak naye qisse bigaaroge | पुरानी बात पर कब तक नए क़िस्से बिगाड़ोगे
- anupam shah
पुरानी
बात
पर
कब
तक
नए
क़िस्से
बिगाड़ोगे
समर
न
दे
सका
तो
क्या
दरख़्तों
को
जला
दोगे
- anupam shah
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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है
कुछ
ऐसी
ही
बात
जो
चुप
हूँ
वर्ना
क्या
बात
कर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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प्यार
मुहब्बत
बाद
की
बातें
जान
कभी
ये
सोचा
है
किसने
तेरा
साथ
दिया
था
कौन
नशे
में
ख़त्म
हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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उसे
किसी
से
मोहब्बत
थी
और
वो
मैं
नहीं
था
ये
बात
मुझ
सेे
ज़ियादा
उसे
रुलाती
थी
Ali Zaryoun
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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ख़्वाब
इतना
भी
हसीं
मत
देखो
नींद
टूटे
तो
न
ये
शब
गुज़रे
anupam shah
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हद
से
अपनी
ये
ज़रा
और
बड़ी
होने
में
टूट
जाती
है
इमारत
ये
खड़ी
होने
में
मुझ
सेे
इक
रोज़
मिलेगा
ये
कहा
है
उसने
अब
तो
सदियां
ही
लगेंगी
वो
घड़ी
होने
में
मसअला
ये
कि
मोहब्बत
को
छुपायें
कैसे
बात
लगती
ही
नहीं
बात
बड़ी
होने
में
टूटता
यूँँ
ही
नहीं
है
यहाँ
कोई
रिश्ता
वक़्त
लगता
है
ये
दीवार
खड़ी
होने
में
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anupam shah
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दीवारों
पे
सर
धुनता
हूँ
बिन
तेरे
कितना
तन्हा
हूँ
ऐसे
तो
पागल
हूँ
फिर
भी
पागल
होने
से
डरता
हूँ
ज़ख़्म
नया
ले
लेता
हूँ
मैं
पिछला
कुछ
ऐसे
भरता
हूँ
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anupam shah
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कुछ
दीवारों
पर
दरवाज़े
होते
हैं
कुछ
दरवाज़े
दीवारों
से
होते
हैं
anupam shah
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बहुत
छोटा
सा
कुम्बा
था
बहुत
छोटा
फ़साना
था
ये
क़ौमों
के
दलालों
ने
मेरा
घर
फूँक
रक्खा
है
anupam shah
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