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Jaun Elia
saari duniya ke gham hamaare hain
saari duniya ke gham hamaare hain | सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
- Jaun Elia
सारी
दुनिया
के
ग़म
हमारे
हैं
और
सितम
ये
कि
हम
तुम्हारे
हैं
- Jaun Elia
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हर
एक
सितम
पे
दाद
दी
हर
ज़ख़्म
पे
दु'आ
हमने
भी
दुश्मनों
को
सताया
बहुत
दिनों
Nawaz Deobandi
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रोने
को
तो
ज़िंदगी
पड़ी
है
कुछ
तेरे
सितम
पे
मुस्कुरा
लें
Firaq Gorakhpuri
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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कौन
उठाएगा
तुम्हारी
ये
जफ़ा
मेरे
बाद
याद
आएगी
बहुत
मेरी
वफ़ा
मेरे
बाद
Ameer Minai
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ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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अपनी
मंज़िल
का
रास्ता
भेजो
जान
हम
को
वहाँ
बुला
भेजो
क्या
हमारा
नहीं
रहा
सावन
ज़ुल्फ़
याँ
भी
कोई
घटा
भेजो
नई
कलियाँ
जो
अब
खिली
हैं
वहाँ
उन
की
ख़ुश्बू
को
इक
ज़रा
भेजो
हम
न
जीते
हैं
और
न
मरते
हैं
दर्द
भेजो
न
तुम
दवा
भेजो
धूल
उड़ती
है
जो
उस
आँगन
में
उस
को
भेजो
सबा
सबा
भेजो
ऐ
फकीरो
गली
के
उस
गुल
की
तुम
हमें
अपनी
ख़ाक-ए-पा
भेजो
शफ़क़-ए-शाम-ए-हिज्र
के
हाथों
अपनी
उतरी
हुई
क़बा
भेजो
कुछ
तो
रिश्ता
है
तुम
से
कम-बख़्तों
कुछ
नहीं
कोई
बद-दुआ'
भेजो
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Jaun Elia
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मुस्कुराए
हम
उस
से
मिलते
वक़्त
रो
न
पड़ते
अगर
ख़ुशी
होती
Jaun Elia
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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इक
हुनर
है
जो
कर
गया
हूँ
मैं
सब
के
दिल
से
उतर
गया
हूँ
मैं
कैसे
अपनी
हँसी
को
ज़ब्त
करूँँ
सुन
रहा
हूँ
कि
घर
गया
हूँ
मैं
क्या
बताऊँ
कि
मर
नहीं
पाता
जीते-जी
जब
से
मर
गया
हूँ
मैं
अब
है
बस
अपना
सामना
दर-पेश
हर
किसी
से
गुज़र
गया
हूँ
मैं
वही
नाज़-ओ-अदा
वही
ग़म्ज़े
सर-ब-सर
आप
पर
गया
हूँ
मैं
अजब
इल्ज़ाम
हूँ
ज़माने
का
कि
यहाँ
सब
के
सर
गया
हूँ
मैं
कभी
ख़ुद
तक
पहुँच
नहीं
पाया
जब
कि
वाँ
उम्र
भर
गया
हूँ
मैं
तुम
से
जानाँ
मिला
हूँ
जिस
दिन
से
बे-तरह
ख़ुद
से
डर
गया
हूँ
मैं
कू-ए-जानाँ
में
सोग
बरपा
है
कि
अचानक
सुधर
गया
हूँ
मैं
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Jaun Elia
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