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anupam shah
bahut kuchh kho diya hai tab kahii ab khud ko paaya hai
bahut kuchh kho diya hai tab kahii ab khud ko paaya hai | बहुत कुछ खो दिया है तब कहीं अब ख़ुद को पाया है
- anupam shah
बहुत
कुछ
खो
दिया
है
तब
कहीं
अब
ख़ुद
को
पाया
है
मिरी
जाँ
इश्क़
हो
या
दुश्मनी
अब
मैं
न
बदलूँगा
- anupam shah
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इज़हार-ए-इश्क़
उस
से
न
करना
था
'शेफ़्ता'
ये
क्या
किया
कि
दोस्त
को
दुश्मन
बना
दिया
Mustafa Khan Shefta
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इसलिए
लड़ता
है
मुझ
सेे
मेरा
दुश्मन
उसका
भी
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
है
Aves Sayyad
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इश्क़
तू
ने
बड़ा
नुक़सान
किया
है
मेरा
मैं
तो
उस
शख़्स
से
नफ़रत
भी
नहीं
कर
सकता
Liaqat Jafri
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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मुनाफ़िक़
दोस्तों
से
लाख
बेहतर
हैं
ख़ुदा
दुश्मन
कि
ग़द्दारी
नवाबों
से
हुकूमत
छीन
लेती
है
Unknown
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भुला
दो
रंग
नफ़रत
के
,
तिरंगा
हाथ
में
लेकर
दिखा
दो
तीन
रंगों
का
सभी
को
प्यार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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उस
के
दुश्मन
हैं
बहुत
आदमी
अच्छा
होगा
वो
भी
मेरी
ही
तरह
शहर
में
तन्हा
होगा
Nida Fazli
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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अगर
तू
ख़ुश
है
मेरी
हार
से
तो
मेरी
हर
जीत
से
नफ़रत
है
मुझको
Shadab Javed
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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हम
ज़रा
बेख़याल
होते
हैं
हम
सेे
जब
भी
सवाल
होते
हैं
झूठ
कहते
हुए
नहीं
डरते
लोग
कितने
कमाल
होते
हैं
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anupam shah
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इन
रास्तों
पे
अब
मैं
बेबस
सा
हो
खड़ा
हूँ
लगता
है
जैसे
मुश्किल
से
वक़्त
में
पड़ा
हूँ
मैं
घर
को
बंद
कर
के
अक्सर
ये
सोचता
हूँ
जाना
कहाँ
था
मुझको
किस
ओर
चल
पड़ा
हूँ
वो
दूर
का
मुसाफ़िर
जाना
है
दूर
उसको
नाहक़
ही
रास्तों
को
मैं
रोक
के
खड़ा
हूँ
औरों
के
वासते
तो
छोड़ा
बहुत
है
रस्ता
बस
बात
अब
है
अपनी
तो
ज़िद
पे
मैं
अड़ा
हूँ
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anupam shah
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क्या
हुआ
वास्ते
किसके
तू
रो
गया
जो
तेरा
था
नहीं
वो
कहीं
खो
गया
इश्क़
उसका
ही
सच्चा
हुआ
है
यहाँ
प्यार
में
खो
गया
प्यार
ही
हो
गया
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anupam shah
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कहाँ
इक
दौर
था
मिलकर
तुम्हें
सब
भूल
जाते
थे
अभी
इक
दौर
है
भूलें
तुम्हें
तो
और
कुछ
देखें
anupam shah
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हैं
जो
बातें
ये
बस
ख़याली
हैं
और
फिर
हाथ
भी
तो
ख़ाली
हैं
anupam shah
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