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anupam shah
yaar paisa to hamne kamaaya bahut
yaar paisa to hamne kamaaya bahut | यार पैसा तो हमने कमाया बहुत
- anupam shah
यार
पैसा
तो
हमने
कमाया
बहुत
और
पानी
के
जैसे
बहाएा
बहुत
एक
वा'दा
किया
साथ
में
साथ
का
एकतरफ़ा
ही
उसको
निभाया
बहुत
मयकशी
ही
तो
थी
उम्र
भर
को
रही
आपने
तो
उसे
भी
छुड़ाया
बहुत
ऐ
ख़ुदा
पास
आकर
के
होना
ज़ुदा
दर्द
होता
है
हमको
ख़ुदाया
बहुत
एक
उम्मीद
पर
जी
गए
ज़िंदगी
एक
उम्मीद
ने
दिल
दुखाया
बहुत
रौशनी
जिनके
होते
हुई
थी
कभी
उन
दियों
ने
हमें
फिर
जलाया
बहुत
रहगुज़र
था
मेरा
राह
में
रह
गया
ऐसे
वैसों
से
तूने
मिलाया
बहुत
- anupam shah
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कुछ
तो
थी
बात
मुहब्बत
में
तेरी
शाहजहाँ
ताज
अब
कौन
बनाता
है
बिछड़ने
पे
यहॉं
anupam shah
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करे
क्या
इश्क़
मस्ताना
ये
अब्र-ए-आ
समाँ
तुम
सेे
असीरी
चश्म-ए-दीदावर
की
ये
कैसे
निभाएगा
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anupam shah
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किसी
पत्थर
की
बस्ती
में
वो
लम्हा
छुप
के
बैठा
है
अभी
तो
कुछ
बरस
लग
जाएँगे
दीवार
ढहने
में
anupam shah
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परिंदा
फड़फड़ाना
चाहता
है
क़फ़स
को
तोड़
देना
चाहता
है
हदों
ने
कर
दिया
इसको
अपाहिज
हदों
से
पार
जाना
चाहता
है
मनाने
में
जिसे
सदियाँ
लगी
थी
वो
मुझ
सेे
रूठ
जाना
चाहता
है
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anupam shah
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रात
से
रोज़
लड़
रहे
हैं
हम
एक
ही
ज़िद
पे
अड़
रहे
हैं
हम
anupam shah
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