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anupam shah
kare kya ishq mastaana ye abr-e-aasmaan tumse
kare kya ishq mastaana ye abr-e-aasmaan tumse | करे क्या इश्क़ मस्ताना ये अब्र-ए-आ
- anupam shah
करे
क्या
इश्क़
मस्ताना
ये
अब्र-ए-आ
समाँ
तुम
सेे
असीरी
चश्म-ए-दीदावर
की
ये
कैसे
निभाएगा
- anupam shah
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वफ़ा
का
ज़ोर
अगर
बाज़ुओं
में
आ
जाए
चराग़
उड़ता
हुआ
जुगनुओं
में
आ
जाए
खिराजे
इश्क़,
कहीं
जा
के
तब
अदा
होगा
हमारा
ख़ून
अगर
आँसुओं
में
आ
जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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अच्छी
लड़की
ज़िद
नहीं
करते
देखो
इश्क़
बुरा
होता
है
Ali Zaryoun
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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मुझे
उस
सेे
मुहब्बत
सच
बड़ी
महँगी
पड़ेगी
अकेलेपन
से
उसने
इश्क़
ऐसा
कर
लिया
है
Anukriti 'Tabassum'
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इशारा
कर
रहे
हैं
बाल
ये
बिखरे
हुए
क्या
तू
मेरे
पास
आया
है
कहीं
होते
हुए
क्या
ये
इतना
हँसने
वाले
इश्क़
में
टूटे
हुए
लोग
तू
इन
से
पूछना
अंदर
से
भी
अच्छे
हुए
क्या
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Kushal Dauneria
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मेरी
अक्ल-ओ-होश
की
सब
हालतें
तुमने
साँचे
में
जुनूँ
के
ढाल
दी
कर
लिया
था
मैंने
अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुमने
फिर
बाँहें
गले
में
डाल
दी
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Jaun Elia
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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इश्क़
जिसको
सभी
समझते
हैं
वहम
है
लज़्ज़त-ए-रसाई
का
Kaif Uddin Khan
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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जी
नहीं
भरता
कभी
इक
बार
में
इश्क़
हम
ने
भी
दोबारा
कर
लिया
shaan manral
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बिछड़कर
आपसे
मैं
क्या
करूँँगा
करूँँगा
जो
भी
मैं
अच्छा
करूँँगा
मोहब्बत
दूसरी
हो
तुम
मिरी
पर
मैं
तुम
सेे
इश्क़
पहला
सा
करूँँगा
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anupam shah
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होंठ
खोले
हुए
खिलखिलाए
हुए
एक
अर्सा
हुआ
मुस्कुराए
हुए
ऐसे
ख़्वाबों
की
ता'बीर
मुमकिन
नहीं
संग
तेरे
जो
लम्हे
बिताए
हुए
मुझ
सेे
रूठा
मुक़द्दर
भी
तेरी
तरह
मुँह
घुमाए
हुए
सिर
झुकाए
हुए
आइनों
से
निकाले
हुए
अक्स
हैं
एक
तस्वीर
में
हम
छुपाए
हुए
आ
गए
हम
अँधेरों
में
इक
रोज़
फिर
इक
दिए
को
सहारा
बनाए
हुए
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anupam shah
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अकेली
रात
में
आँखों
को
मेरी
एक
सपना
दे
बुरा
दे
ख़्वाब
मुझको
तू
मगर
तू
ख़्वाब
अपना
दे
anupam shah
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मैं
कहाँ
का
था
कहाँ
का
कर
गए
कितना
तुम
मेरा
मुनाफ़ा
कर
गए
ग़म
मिटाने
आए
थे
तुम
तो
मिरे
तुम
मिरे
ग़म
में
इज़ाफ़ा
कर
गए
पूछते
थे
साथ
दोगे
उम्र
भर
जो
मुझे
अब
बेसहारा
कर
गए
जो
दु'आ
थी
बद्दुआ
जैसी
लगी
आप
कैसा
इस्तिख़ारा
कर
गए
सामने
दरिया
था
और
प्यासा
था
मैं
और
वो
मुझ
सेे
किनारा
कर
गए
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anupam shah
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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