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anupam shah
sharaabon se khumaari aa rahi hai
sharaabon se khumaari aa rahi hai | शराबों से ख़ुमारी आ रही है
- anupam shah
शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
- anupam shah
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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तुम्हारा
प्यार
तो
साँसों
में
साँस
लेता
है
जो
होता
नश्शा
तो
इक
दिन
उतर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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वो
नशा
है
के
ज़बाँ
अक़्ल
से
करती
है
फ़रेब
तू
मिरी
बात
के
मफ़्हूम
पे
जाता
है
कहाँ
Pallav Mishra
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शायद
शराब
पीके
तुम्हें
फ़ोन
मैं
करूँँ
बस
इसलिए
शराब
कभी
पी
नहीं
मैंने
Tanoj Dadhich
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ये
जो
मैं
होश
में
रहता
नहीं
तुम
सेे
मिल
कर
ये
मिरा
इश्क़
है
तुम
इसको
नशा
मत
समझो
Shakeel Azmi
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नमकीं
गोया
कबाब
हैं
फीके
शराब
के
बोसा
है
तुझ
लबाँ
का
मज़े-दार
चटपटा
Abroo Shah Mubarak
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तेरी
यादों
ने
मुझे
बदनाम
कर
रक्खा
है
कुछ
यूँँ
लोग
कहते
हैं
कि
लड़का
ये
शराबी
बन
चुका
है
Harsh saxena
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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इस
तरह
से
तुम्हें
मैं
ज़िंदगी
में
लाऊँगा
गीत
पर
गीत
लिख
के
रोज़
तुझको
गाऊँगा
एक
शायर
ने
तेरा
नाम
लिख
लिया
दिल
पे
और
फिर
क्या
हसीं
ग़ज़ल
तुझे
सुनाऊँगा
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anupam shah
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बाद
तेरे
सुकूँ
तलाश
किया
हमको
हर
शय
ने
फिर
हताश
किया
कुछ
को
कांधा
दिया
लहू
कुछ
को
हमने
हर
चीड़
को
पलाश
किया
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anupam shah
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मैं
अरसे
बाद
इतनी
कशमकश
से
फिर
से
गुज़रा
हूँ
कि
तेरी
इंतिज़ारी
है
औ'
तन्हा
भी
बहुत
ख़ुश
हूँ
anupam shah
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मैं
कहाँ
का
था
कहाँ
का
कर
गए
कितना
तुम
मेरा
मुनाफ़ा
कर
गए
ग़म
मिटाने
आए
थे
तुम
तो
मिरे
तुम
मिरे
ग़म
में
इज़ाफ़ा
कर
गए
पूछते
थे
साथ
दोगे
उम्र
भर
जो
मुझे
अब
बेसहारा
कर
गए
जो
दु'आ
थी
बद्दुआ
जैसी
लगी
आप
कैसा
इस्तिख़ारा
कर
गए
सामने
दरिया
था
और
प्यासा
था
मैं
और
वो
मुझ
सेे
किनारा
कर
गए
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anupam shah
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बिछड़कर
आपसे
मैं
क्या
करूँँगा
करूँँगा
जो
भी
मैं
अच्छा
करूँँगा
मोहब्बत
दूसरी
हो
तुम
मिरी
पर
मैं
तुम
सेे
इश्क़
पहला
सा
करूँँगा
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anupam shah
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