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Shakeel Azmi
ye jo main hosh men rehta nahin tumse mil kar
ye jo main hosh men rehta nahin tumse mil kar | ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर
- Shakeel Azmi
ये
जो
मैं
होश
में
रहता
नहीं
तुम
सेे
मिल
कर
ये
मिरा
इश्क़
है
तुम
इसको
नशा
मत
समझो
- Shakeel Azmi
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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लिखी
होगी
मोहब्बत
जिन
सफ़ों
पर
मेरा
दावा
है
वो
नम
ही
मिलेंगे
किसी
दिन
ऊब
जाओगे
सभी
से
तुम्हें
उस
रोज़
फिर
हम
ही
मिलेंगे
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Ritesh Rajwada
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मैं
दौड़
दौड़
के
ख़ुद
को
पकड़
के
लाता
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
ने
बच्चा
बना
दिया
है
मुझे
Liaqat Jafri
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इश्क़
को
एक
उम्र
चाहिए
और
उम्र
का
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jigar Barelvi
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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तुम
ने
स्वेटर
बुना
था
मिरे
नाम
का
मैं
भी
लाया
था
कुछ
सर्दियाँ
जंगली
Shakeel Azmi
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वो
बुझ
गया
तो
चला
उसकी
अहमियत
का
पता
कि
उस
की
आग
से
कितने
चराग़
जलते
थे
Shakeel Azmi
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मैं
भी
तुम
जैसा
हूँ
अपने
से
जुदा
मत
समझो
आदमी
ही
मुझे
रहने
दो
ख़ुदा
मत
समझो
ये
जो
मैं
होश
में
रहता
नहीं
तुम
सेे
मिल
कर
ये
मिरा
इश्क़
है
तुम
इसको
नशा
मत
समझो
रास
आता
नहीं
सबको
ये
मोहब्बत
का
मरज़
मेरी
बीमारी
को
तुम
अपनी
दवा
मत
समझो
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Shakeel Azmi
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कच्ची
'उम्रों
में
हमें
काम
पर
लगा
दिया
गया
हम
वो
बच्चे
जो
जवानी
से
अलग
कर
दिए
गए
Shakeel Azmi
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आदमी
होता
है
माहौल
से
अच्छा
या
बुरा
जानवर
घर
में
रखे
जाएँ
तो
इंसान
से
हैं
Shakeel Azmi
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