tumhein sochkar ke main yuñ khil raha hooñ | तुम्हें सोचकर के मैं यूँँ खिल रहा हूँ

  - anupam shah
तुम्हेंसोचकरकेमैंयूँँखिलरहाहूँ
किकरवटबदलकरतुम्हेंमिलरहाहूँ
वोजिसपरसेलौटेहैंसारेमुसाफ़िर
मैंऐसेहीदरियाकासाहिलरहाहूँ
बहुतवक़्तबीतासमझनेमेंयेभी
मैंआसाँरहाहूँयामुश्किलरहाहूँ
मुझेछोड़नेकागुमाँयूँँकरना
जानेमैंकितनोंकीमंज़िलरहाहूँ
  - anupam shah
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