shor ki jab ye aadat ha | शोर की जब ये आदत हमें हो गई

  - anupam shah
शोरकीजबयेआदतहमेंहोगई
बज़्मतन्हाहमेंकरकेख़ुदसोगई
सबसेेमिलतारहानामलेकरतेरा
येख़तामुझसेेसौमर्तबाहोगई
टूटकरकेमैंसचकोदिखातारहा
आइनोसीमेरीज़िन्दगीहोगई
उसकीइकमुस्कुराहटकोतड़पेबहुत
वोख़फ़ाजबहुईआपहीरोगई
एकतितलीजोथीफूलपरबसफ़िदा
उड़गईंखुशबुएँबे-वफ़ाहोगई
  - anupam shah
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