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anupam shah
chaah li aaj raushni maine
chaah li aaj raushni maine | चाह ली आज रौशनी मैंने
- anupam shah
चाह
ली
आज
रौशनी
मैंने
एक
बेफ़िक्र
ज़िन्दगी
मैंने
बाम
पर
फिर
दिया
जलाया
है
आपकी
राह
फिर
तकी
मैंने
- anupam shah
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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जिस
किसी
से
तेरा
चक्कर
चल
रहा
था
उसको
मैं
अच्छी
तरह
से
जानता
था
रातें
रौशन
थी
किसी
की
तुझ
सेे
दिलबर
तो
किसी
का
तेरे
बा'इस
रत-जगा
था
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Dileep Kumar
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शहसवारों
ने
रौशनी
माँगी
मैं
ने
बैसाखियाँ
जला
डालीं
Fahmi Badayuni
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कुछ
फ़र्क़
क्यूँँ
हो
मुझ
में
जो
रौशन
हुए
हैं
आप
जलता
नहीं
है
चाँद
सितारों
को
देखकर
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Tanoj Dadhich
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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अभी
रौशन
हुआ
जाता
है
रस्ता
वो
देखो
एक
औरत
आ
रही
है
Shakeel Jamali
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
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Subhan Asad
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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आज
की
शाम
ज़रा
रात
तक
ठहर
जाए
काश
ऐसा
भी
हो
ये
चांँद
भी
न
घर
जाए
anupam shah
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मोहब्बत
में
इज़ाफ़ा
हो
रहा
है
मगर
ख़र्चा
ज़ियादा
हो
रहा
है
anupam shah
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हँसना-वसना
धीरे
धीरे
कम
होगा
धीरे
धीरे
दिख
जाएँगे
सब
चेहरे
anupam shah
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रात
से
रोज़
लड़
रहे
हैं
हम
एक
ही
ज़िद
पे
अड़
रहे
हैं
हम
anupam shah
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सुकूँ
के
पल
बिताने
चाहिए
थे
हमें
लम्हें
चुराने
चाहिए
थे
पहल
हम
कर
नहीं
पाए
जहाँ
पर
वही
किस्से
बढ़ाने
चाहिए
थे
तुम्हें
जाना
ही
था
इक
दिन
यहाँ
से
तुम्हें
तो
बस
बहाने
चाहिए
थे
उन्हीं
सब
वाक़यो
पर
रो
रहे
हैं
हँसी
में
जो
उड़ाने
चाहिए
थे
तिरा
ही
फ़ैसला
था
ग़म
है
क्यूँँ
अब,
ये
लब
तो
मुस्कुराने
चाहिए
थे
कहाँ
तुम
कुण्डली
के
फेर
में
थे
दिलों
से
दिल
मिलाने
चाहिए
थे
मैं
माज़ी
में
भटकता
फिर
रहा
था
मुझे
दिन
फिर
पुराने
चाहिए
थे
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anupam shah
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