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Fahmi Badayuni
shahsawaron ne raushni maangi
shahsawaron ne raushni maangi | शहसवारों ने रौशनी माँगी
- Fahmi Badayuni
शहसवारों
ने
रौशनी
माँगी
मैं
ने
बैसाखियाँ
जला
डालीं
- Fahmi Badayuni
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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रौशनी
आधी
इधर
आधी
उधर
इक
दिया
रक्खा
है
दीवारों
के
बीच
Obaidullah Aleem
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कुछ
फ़र्क़
क्यूँँ
हो
मुझ
में
जो
रौशन
हुए
हैं
आप
जलता
नहीं
है
चाँद
सितारों
को
देखकर
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Tanoj Dadhich
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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हम
अपनी
धूप
में
बैठे
हैं
'मुश्ताक़'
हमारे
साथ
है
साया
हमारा
Ahmad Mushtaq
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लड़कियाँ
बैठी
थीं
पाँव
डालकर
रौशनी
सी
हो
गई
तालाब
में
Parveen Shakir
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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जली
हैं
धूप
में
शक्लें
जो
माहताब
की
थीं
खिंची
हैं
काँटों
पे
जो
पत्तियाँ
गुलाब
की
थीं
Dagh Dehlvi
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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चलती
साँसों
को
जाम
करने
लगा
वो
नज़र
से
कलाम
करने
लगा
रात
फ़रहाद
ख़्वाब
में
आया
और
फ़र्शी
सलाम
करने
लगा
फिर
मैं
ज़हरीले
कार-ख़ानों
में
ज़िंदा
रहने
का
काम
करने
लगा
साफ़
इंकार
कर
नहीं
पाया
वो
मिरा
एहतिराम
करने
लगा
लैला
घर
में
सिलाई
करने
लगी
क़ैस
दिल्ली
में
काम
करने
लगा
हिज्र
के
माल
से
दिल-ए-नादाँ
वस्ल
का
इंतिज़ाम
करने
लगा
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Fahmi Badayuni
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काश
वो
रास्ते
में
मिल
जाए
मुझ
को
मुँह
फेर
कर
गुज़रना
है
Fahmi Badayuni
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तसल्ली
दे
रहे
हैं
चारा-गर
को
समझ
लो
हाल
है
कैसा
हमारा
Fahmi Badayuni
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मोहब्बत
अपनी
क़िस्मत
में
नहीं
है
इबादत
से
गुज़ारा
कर
रहे
है
Fahmi Badayuni
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वलवले
जब
हवा
के
बैठ
गए
हम
भी
शमएँ
बुझा
के
बैठ
गए
वक़्त
आया
जो
तीर
खाने
का
मशवरे
दूर
जा
के
बैठ
गए
ईद
के
रोज़
हम
फटी
चादर
पिछली
सफ़
में
बिछा
के
बैठ
गए
कोई
बारात
ही
नहीं
आई
रतजगे
गा
बजा
के
बैठ
गए
नाव
टूटी
तो
सारे
पर्दा-नशीं
सामने
ना-ख़ुदा
के
बैठ
गए
बे-ज़बानी
में
और
क्या
करते
गालियाँ
सुन-सुना
के
बैठ
गए
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Fahmi Badayuni
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