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Anjali Sahar
dil-e-naadaañ tu gar nahin hota
dil-e-naadaañ tu gar nahin hota | दिल-ए-नादाँ तू गर नहीं होता
- Anjali Sahar
दिल-ए-नादाँ
तू
गर
नहीं
होता
ग़म
न
होता
ख़ुशी
नहीं
होती
गर
हमें
सब्र-ओ-ज़ब्त
आ
जाता
अपनी
जन्नत
यही
ज़मीं
होती
- Anjali Sahar
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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घर
से
निकले
हुए
बेटों
का
मुक़द्दर
मालूम
माँ
के
क़दमों
में
भी
जन्नत
नहीं
मिलने
वाली
Iftikhar Arif
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काश
जन्नत
हमें
मिले
ऐसी
हर
तरफ़
आशिक़ाना
मौसम
हो
Amaan Pathan
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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अगर
जन्नत
मिला
करती
फ़क़त
सज्दों
के
बदले
में
तो
फिर
इबलीस
मुर्शिद
सब
सेे
पहले
जन्नती
होता
Shajar Abbas
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
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Ashok Sagar
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इसी
दुनिया
में
दिखा
दें
तुम्हें
जन्नत
की
बहार
शैख़
जी
तुम
भी
ज़रा
कू-ए-बुताँ
तक
आओ
Ali Sardar Jafri
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फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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हम
आसमाँ
के
लोग
थे
जन्नत
से
आए
थे
ख़ुद
को
मगर
ज़मीं
में
बोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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पानी,
किरन,
हवा
भी
मुयस्सर
नहीं
हुए
ये
हौसला
है
अपना
कि
बंजर
नहीं
हुए
Anjali Sahar
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बे-वजह
क्यूँँ
मिरे
दिल
तू
धकधक
करे
इक
नज़र
दर
पे
और
इक
घड़ी
की
तरफ़
Anjali Sahar
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दो
चार
पल
का
है
ये
ग़म-ए-तीरगी
सहर
लाई
है
अपने
साथ
सदा
रौशनी
सहर
जज़्बात
दूसरों
के
समझता
है
कौन
अब
है
अपनी
अपनी
सबकी
ग़मी
और
ख़ुशी
सहर
दौर-ए-ग़म-ए-फ़िराक़
भी
दुख
है
कोई
भला
देखी
नहीं
है
तुमने
अभी
बेबसी
सहर
मंज़िल
अगर
क़रीब
है
तो
छू
के
देखिए
पानी
है
या
सराब
कोई
'अंजली
सहर'
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Anjali Sahar
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जिस
तरह
हो
गए
जंगल
ख़ामोश
हो
रही
हूँ
मैं
मुसलसल
ख़ामोश
मुझ
में
बाक़ी
नहीं
चिंगारी
भी
आग
होनी
ही
थी
जल
जल
ख़ामोश
ख़ास
वक़्तों
में
छलक
जाती
हूँ
मैं
दरिया
रहता
नहीं
हर
पल
ख़ामोश
और
ताख़ीर
न
कर
आने
में
हो
न
जाऊँ
मैं
मुकम्मल
ख़ामोश
कौन
आख़िर
तुझे
समझाए
'सहर'
ऐसे
रोते
नहीं,
पागल,
ख़ामोश
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Anjali Sahar
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हम
सेे
कटता
नहीं
ग़मों
का
पहाड़
लोग
कहते
हैं
ज़िंदगी
कम
है
Anjali Sahar
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