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Anjali Sahar
do chaar pal ka hai ye gham-e-teergi sehar
do chaar pal ka hai ye gham-e-teergi sehar | दो चार पल का है ये ग़म-ए-तीरगी सहर
- Anjali Sahar
दो
चार
पल
का
है
ये
ग़म-ए-तीरगी
सहर
लाई
है
अपने
साथ
सदा
रौशनी
सहर
जज़्बात
दूसरों
के
समझता
है
कौन
अब
है
अपनी
अपनी
सबकी
ग़मी
और
ख़ुशी
सहर
दौर-ए-ग़म-ए-फ़िराक़
भी
दुख
है
कोई
भला
देखी
नहीं
है
तुमने
अभी
बेबसी
सहर
मंज़िल
अगर
क़रीब
है
तो
छू
के
देखिए
पानी
है
या
सराब
कोई
'अंजली
सहर'
- Anjali Sahar
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स्पैशलिस्ट
पेन-किलर
दे
तो
कौन
सा?
''सारे
जहाँ
का
दर्द
हमारे
जिगर
में
है''
Sarfaraz Shahid
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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ज़िन्दगी
पर
लिख
दिया
था
नाम
मैंने
राम
का
और
फिर
दुख
के
समुंदर
पार
सारे
हो
गए
Tanoj Dadhich
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हमारी
उम्र
के
लड़के
ग़ज़ल
तो
लिख
रहे
हैं
पर
ये
इतना
दर्द
लेके
जी
रहे
हैं
ठीक
थोड़ी
है
Ramesh Singh
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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ख़ुदा
ने
फ़न
दिया
हमको
कि
लड़के
इश्क़
लिखेंगे
ख़ुदा
कब
जानता
था
हम,
ग़ज़ल
में
दर्द
भर
देंगे
Prashant Sharma Daraz
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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ज़ख़्म
दिल
के
भरे
नहीं
अब
तक
और
इक
दर्द
फिर
हरा
कर
लूँ
अब
भरोसा
नहीं
किसी
का
पर
तू
कहे
तो
यक़ीं
तिरा
कर
लूँ
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Harsh saxena
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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कभी
सहर
तो
कभी
शाम
ले
गया
मुझ
से
तुम्हारा
दर्द
कई
काम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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जिस
सेे
डर
कर
गए
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
लौट
आए
उसी
ज़िंदगी
की
तरफ़
बे-वजह
क्यूँँ
मेरे
दिल
तू
धकधक
करे
इक
नज़र
दर
पे
और
इक
घड़ी
की
तरफ़
दो
दिलों
को
मुहब्बत
से
वीरान
कर
मोड़
देते
हैं
इक
अजनबी
की
तरफ़
सरसरी
बात
कोई
मैं
करती
नहीं
ग़ौर
कीजे
मिरी
हर
कही
की
तरफ़
तकते
हैं
ग़म
मिरी
ओर
उम्मीद
से
बाहें
फैलाऊँ
कैसे
ख़ुशी
की
तरफ़
ऐ
मुसाफ़िर
खड़ा
किसका
रस्ता
तके
कोई
आता
नहीं
इस
गली
की
तरफ़
ज़िंदगी
है
कि
रुकती
नहीं
और
'सहर'
कोई
रस्ता
नहीं
वापसी
की
तरफ़
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Anjali Sahar
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मुश्किलों
से
भरी
डगर
है
एक
ज़िंदगी
जीना
भी
हुनर
है
एक
धूप
तो
कोई
मसअला
ही
नहीं
हाँ!
तुम्हें
साया-ए-शजर
है
एक
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Anjali Sahar
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हम
सेे
कटता
नहीं
ग़मों
का
पहाड़
लोग
कहते
हैं
ज़िंदगी
कम
है
Anjali Sahar
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दो
दिलों
को
मुहब्बत
से
वीरान
कर
मोड़
देते
हैं
इक
अजनबी
की
तरफ़
Anjali Sahar
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पानी,
किरन,
हवा
भी
मुयस्सर
नहीं
हुए
ये
हौसला
है
अपना
कि
बंजर
नहीं
हुए
Anjali Sahar
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