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Anjali Sahar
Be wajah kyun meri dil tu dhakdhak kare
बे-वजह क्यूँँ मिरे दिल तू धकधक करे
- Anjali Sahar
बे-वजह
क्यूँँ
मिरे
दिल
तू
धकधक
करे
इक
नज़र
दर
पे
और
इक
घड़ी
की
तरफ़
- Anjali Sahar
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दो
दिलों
को
मुहब्बत
से
वीरान
कर
मोड़
देते
हैं
इक
अजनबी
की
तरफ़
Anjali Sahar
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दो
चार
पल
का
है
ये
ग़म-ए-तीरगी
सहर
लाई
है
अपने
साथ
सदा
रौशनी
सहर
जज़्बात
दूसरों
के
समझता
है
कौन
अब
है
अपनी
अपनी
सबकी
ग़मी
और
ख़ुशी
सहर
दौर-ए-ग़म-ए-फ़िराक़
भी
दुख
है
कोई
भला
देखी
नहीं
है
तुमने
अभी
बेबसी
सहर
मंज़िल
अगर
क़रीब
है
तो
छू
के
देखिए
पानी
है
या
सराब
कोई
'अंजली
सहर'
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Anjali Sahar
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जिस
सेे
डर
कर
गए
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
लौट
आए
उसी
ज़िंदगी
की
तरफ़
बे-वजह
क्यूँँ
मेरे
दिल
तू
धकधक
करे
इक
नज़र
दर
पे
और
इक
घड़ी
की
तरफ़
दो
दिलों
को
मुहब्बत
से
वीरान
कर
मोड़
देते
हैं
इक
अजनबी
की
तरफ़
सरसरी
बात
कोई
मैं
करती
नहीं
ग़ौर
कीजे
मिरी
हर
कही
की
तरफ़
तकते
हैं
ग़म
मिरी
ओर
उम्मीद
से
बाहें
फैलाऊँ
कैसे
ख़ुशी
की
तरफ़
ऐ
मुसाफ़िर
खड़ा
किसका
रस्ता
तके
कोई
आता
नहीं
इस
गली
की
तरफ़
ज़िंदगी
है
कि
रुकती
नहीं
और
'सहर'
कोई
रस्ता
नहीं
वापसी
की
तरफ़
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ज़िंदगी
अब
कुछ
और
नहीं
दरकार
मुझे
अच्छी
भली
उदासी
है
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कोई
उम्मीद
जब
नहीं
होती
होती
है
एक
ख़ुद-कुशी
उम्मीद
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