raat se jang koi khel naiiñ | रात से जंग कोई खेल नईं

  - Ammar Iqbal
रातसेजंगकोईखेलनईं
तुमचराग़ोंमेंइतनातेलनईं
गयाहूँतोखींचअपनीतरफ़
मेरीजानिबमुझेधकेलनईं
जबमैंचाहूँगाछोड़जाऊँगा
इकसराएहैजिस्मजेलनईं
बेंचदेखीहैख़्वाबमेंख़ाली
औरपटरीपरउसपेरेलनईं
जिसकोदेखाथाकलदरख़्तकेगिर्द
वोहराअज़दहाथाबेलनईं
  - Ammar Iqbal
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