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Shariq Kaifi
yahiin tak is shikaayat ko na samjho
yahiin tak is shikaayat ko na samjho | यहीं तक इस शिकायत को न समझो
- Shariq Kaifi
यहीं
तक
इस
शिकायत
को
न
समझो
ख़ुदा
तक
जाएगा
झगड़ा
हमारा
- Shariq Kaifi
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हम
नहीं
वो
जो
करें
ख़ून
का
दावा
तुझ
पर
बल्कि
पूछेगा
ख़ुदा
भी
तो
मुकर
जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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कश्तियाँ
सब
की
किनारे
पे
पहुँच
जाती
हैं
नाख़ुदा
जिन
का
नहीं
उन
का
ख़ुदा
होता
है
Ameer Minai
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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गुनाहगार
को
इतना
पता
तो
होता
है
जहाँ
कोई
नहीं
होता
ख़ुदा
तो
होता
है
Waseem Barelvi
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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जहान
वालों
से
कह
दो
यहाँ
से
हट
जाएँ
ख़ुदा
के
और
मेरे
दरमियाँ
से
हट
जाएँ
Siraj Faisal Khan
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ख़ुदा
ऐसे
एहसास
का
नाम
है
रहे
सामने
और
दिखाई
न
दे
Bashir Badr
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कहा
था
क्या
और
क्या
बने
हो
अजब
सा
इक
मसअला
बने
हो
हमारी
मर्ज़ी
कहाँ
थी
शामिल
तुम
अपने
मन
से
ख़ुदा
बने
हो
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Ritesh Rajwada
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तेरे
ही
लिए
आएँगे
तेरे
पास
किसी
से
बिछड़कर
नहीं
आएँगे
बुरा
मानिए
तो
बुरा
मानिए
इजाज़त
तो
लेकर
नहीं
आएँगे
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Shariq Kaifi
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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साल
के
आख़िरी
दिन
उसने
दिया
वक़्त
हमें
अब
तो
ये
साल
कई
साल
नहीं
गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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सच
तो
बैठ
के
खाता
है
झूठ
कमा
कर
लाता
है
याद
भी
कोई
आता
है
याद
तो
रक्ख
जाता
है
जैसे
लफ़्ज़
हों
वैसा
ही
मुँह
का
मज़ा
हो
जाता
है
फिर
दुश्मन
बढ़
जाएँगे
किस
को
दोस्त
बनाता
है
कैसी
ख़ुश्क
हवाएँ
हैं
सुब्ह
से
दिन
चढ़
जाता
है
उसे
घटा
कर
दुनिया
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
जाने
वो
इस
चेहरे
पर
किस
का
धोका
खाता
है
इश्क़
से
बढ़
कर
कौन
हमें
दुनियादार
बनाता
है
दिल
जैसा
मासूम
भी
आज
अपनी
अक़्ल
चलाता
है
कुछ
तो
है
जो
सिर्फ़
यहाँ
मेरी
समझ
में
आता
है
मुश्किल
सुन
ली
जाती
है
कोई
करम
फ़रमाता
है
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Shariq Kaifi
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कौन
कह
सकता
है
उसको
देखकर
ये
वही
है
जो
हमारा
था
कभी
Shariq Kaifi
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