sach to baith ke khaata hai | सच तो बैठ के खाता है

  - Shariq Kaifi
सचतोबैठकेखाताहै
झूठकमाकरलाताहै
यादभीकोईआताहै
यादतोरक्खजाताहै
जैसेलफ़्ज़होंवैसाही
मुँहकामज़ाहोजाताहै
फिरदुश्मनबढ़जाएँगे
किसकोदोस्तबनाताहै
कैसीख़ुश्कहवाएँहैं
सुब्हसेदिनचढ़जाताहै
उसेघटाकरदुनियामें
बाक़ीक्यारहजाताहै
जानेवोइसचेहरेपर
किसकाधोकाखाताहै
इश्क़सेबढ़करकौनहमें
दुनियादारबनाताहै
दिलजैसामासूमभीआज
अपनीअक़्लचलाताहै
कुछतोहैजोसिर्फ़यहाँ
मेरीसमझमेंआताहै
मुश्किलसुनलीजातीहै
कोईकरमफ़रमाताहै
  - Shariq Kaifi
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