hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Ammar Iqbal
KHud hi jaane lage the aur KHud hi
KHud hi jaane lage the aur KHud hi | ख़ुद ही जाने लगे थे और ख़ुद ही
- Ammar Iqbal
ख़ुद
ही
जाने
लगे
थे
और
ख़ुद
ही
रास्ता
रोक
कर
खड़े
हुए
हैं
- Ammar Iqbal
Download Sher Image
सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
Send
Download Image
10 Likes
कहाँ
आ
के
रुकने
थे
रास्ते
कहाँ
मोड़
था
उसे
भूल
जा
वो
जो
मिल
गया
उसे
याद
रख
जो
नहीं
मिला
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
Send
Download Image
47 Likes
रास्ता
सोचते
रहने
से
किधर
बनता
है
सर
में
सौदा
हो
तो
दीवार
में
दर
बनता
है
Jaleel 'Aali'
Send
Download Image
23 Likes
वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
Send
Download Image
24 Likes
हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
Send
Download Image
370 Likes
औरों
का
बताया
हुआ
रस्ता
नहीं
चुनते
जो
इश्क़
चुना
करते
हैं,
दुनिया
नहीं
चुनते
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
39 Likes
काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
Send
Download Image
23 Likes
बात
करने
का
हसीं
तौर-तरीक़ा
सीखा
हम
ने
उर्दू
के
बहाने
से
सलीक़ा
सीखा
Manish Shukla
Send
Download Image
28 Likes
दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
Send
Download Image
30 Likes
मक़ाम
'फ़ैज़'
कोई
राह
में
जचा
ही
नहीं
जो
कू-ए-यार
से
निकले
तो
सू-ए-दार
चले
Faiz Ahmad Faiz
Send
Download Image
34 Likes
Read More
उसने
नासूर
कर
लिया
होगा
ज़ख़्म
को
शाएरी
बनाते
हुए
Ammar Iqbal
Send
Download Image
35 Likes
यूँँही
बे-बाल-ओ-पर
खड़े
हुए
हैं
हम
क़फ़स
तोड़
कर
खड़े
हुए
हैं
दश्त
गुज़रा
है
मेरे
कमरे
से
और
दीवार-ओ-दर
खड़े
हुए
हैं
ख़ुद
ही
जाने
लगे
थे
और
ख़ुद
ही
रास्ता
रोक
कर
खड़े
हुए
हैं
और
कितनी
घुमाओगे
दुनिया
हम
तो
सर
थाम
कर
खड़े
हुए
हैं
बरगुज़ीदा
बुज़ुर्ग
नीम
के
पेड़
थक
गए
हैं
मगर
खड़े
हुए
हैं
मुद्दतों
से
हज़ार-हा
आलम
एक
उम्मीद
पर
खड़े
हुए
हैं
Read Full
Ammar Iqbal
Download Image
1 Like
ख़ुद-परस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
अपनी
हस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
जब
से
देखा
है
इस
फ़क़ीरनी
को
फ़ाक़ा-मस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
एक
दरवेश
को
तिरी
ख़ातिर
सारी
बस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
ख़ुद
तराशा
है
जब
से
बुत
अपना
बुत-परस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
ये
फ़लक-ज़ाद
की
कहानी
है
इस
को
पस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
Read Full
Ammar Iqbal
Download Image
6 Likes
कैसे
कैसे
बना
दिए
चेहरे
अपनी
बे-चेहरगी
बनाते
हुए
Ammar Iqbal
Send
Download Image
34 Likes
ज़रा
सी
देर
जले
जल
के
राख
हो
जाए
वो
रौशनी
दे
भले
जल
के
राख
हो
जाए
वो
आफ़्ताब
जिसे
सब
सलाम
करते
हैं
जो
वक़्त
पर
न
ढले
जल
के
राख
हो
जाए
मैं
दूर
जा
के
कहीं
बाँसुरी
बजाऊँगा
बला
से
रोम
जले
जल
के
राख
हो
जाए
वो
एक
लम्स-ए-गुरेज़ाँ
है
आतिश-ए-बे-सोज़
मुझे
लगाए
गले
जल
के
राख
हो
जाए
कोई
चराग़
बचे
सुब्ह
तक
तो
तारीकी
उसी
चराग़-तले
जल
के
राख
हो
जाए
Read Full
Ammar Iqbal
Download Image
6 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Wedding Shayari
Mood off Shayari
Romance Shayari
Berozgari Shayari
Kitaaben Shayari