kyun na hon shaad ki ham raahguzar men hain abhii | क्यूँँ न हों शाद कि हम राहगुज़र में हैं अभी

  - Ambar Bahraichi
क्यूँँहोंशादकिहमराहगुज़रमेंहैंअभी
दश्त-ए-बे-सब्ज़मेंऔरधूपनगरमेंहैंअभी
सुर्ख़आज़रहीमिरेज़ख़्मोंपेहोयूँँमसरूर
कईशहपरमिरेटूटेहुएपरमेंहैंअभी
इनधुँदलकोंकीहरइकचालतोशातिरहैमगर
नुक़रईनक़्शमिरेदस्त-ए-हुनरमेंहैंअभी
उम्रभरमैंतोरहाख़ाना-बदोशीमेंइधर
कुछकबूतरमिरेअस्लाफ़केघरमेंहैंअभी
एकमुद्दतसेकोईसब्ज़उभराइसमें
घोंसलेचीलकेबे-बर्गशजरमेंहैंअभी
शहरकीधूलफ़ज़ाएँहीमुक़द्दरमेंरहीं
आमकेबोरमगरमेरीनज़रमेंहैंअभी
राखकेढेरपेमातमकरोदेखोभी
कईशोलेकिसीबे-जानशररमेंहैंअभी
एकसाहिरकभीगुज़राथाइधरसे'अंबर'
जा-ए-हैरतकिसभीउसकेअसरमेंहैंअभी
  - Ambar Bahraichi
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