chehron pe zar-posh andhere phaile hain | चेहरों पे ज़र-पोश अंधेरे फैले हैं

  - Ambar Bahraichi
चेहरोंपेज़र-पोशअंधेरेफैलेहैं
अबजीनेकेढंगबड़ेहीमहँगेहैं
हाथोंमेंसूरजलेकरक्यूँँफिरतेहैं
इसबस्तीमेंअबदीदा-वरकितनेहैं
क़द्रोंकीशब-रेज़ीपरहैरानीक्यूँँ
ज़ेहनोंमेंअबकालेसूरजपलतेहैं
हरभरेजंगलकटकरअबशहरहुए
बंजारेकीआँखोंमेंसन्नाटेहैं
फूलोंवालेटापूतोग़र्क़ाबहुए
आगअगलेनएजज़ीरेउभरेहैं
उसकेबोसीदा-कपड़ोंपरमतजाओ
मस्तक़लंदरकीझोलीमेंहीरेहैं
ज़िक्रकरोहोमुझसेक्यातुग़्यानीका
साहिलपरहीअपनेरेनबसेरेहैं
इसवादीकातोदस्तूरनिरालाहै
फूलसरोंपरकंकरपत्थरढोतेहैं
'अंबर'लाखसवापंखीमौसमआएँ
वोलोंकीज़दमेंअनमोलपरिंदेहैं
  - Ambar Bahraichi
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