vo lamha mujh ko shashdar kar gaya tha | वो लम्हा मुझ को शश्दर कर गया था

  - Ambar Bahraichi
वोलम्हामुझकोशश्दरकरगयाथा
मिरेअंदरभीलावाभरगयाथा
हैदोनोंसम्तवीरानीकाआलम
इसीरस्तेसेवोलश्करगयाथा
गुज़ारीथीभँवरमेंउसनेलेकिन
वोमाँझीसाहिलोंसेडरगयाथा
क़लंदरमुतमइनथाझोंपड़ेमें
अबसउसकेलिएमहज़रगयाथा
जानेकैसीआहटथीफ़ज़ामें
वोदिनढलतेहीअपनेघरगयाथा
अभीतकबाम-ओ-दरहैंफूलजैसे
मिरेघरभीवोखुश-मंज़रगयाथा
सितारेबा-अदबठहरेहुएथे
ख़लामेंएकख़ुश-पैकरगयाथा
इधरआँखोंमेंमेरीधूलठहरी
उधरशबनमसेमंज़रभरगयाथा
मगरतिश्ना-लबीठहरीमुक़द्दर
नदीकेपासभी'अंबर'गयाथा
  - Ambar Bahraichi
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