hanste hue chehre men koi shaam chhupi thii | हँसते हुए चेहरे में कोई शाम छुपी थी

  - Ambar Bahraichi
हँसतेहुएचेहरेमेंकोईशामछुपीथी
ख़ुश-लहजातख़ातुबकीखनकनीमचढ़ीथी
जल्वोंकीअनातोड़गईएकहीपलमें
कचनारसीबिजलीमेरेसीनेमेंउड़ीथी
पीतारहादरियाकेतमव्वुजकोशनावर
होंटोंपेनदीकेभीअजबतिश्ना-लबीथी
ख़ुश-रंगमआनीकेतआक़ुबमेंरहामैं
ख़त्त-ए-लब-ए-लालींकीहरइकमौजख़फ़ीथी
हरसम्तरम-ए-हफ़्तबलाशोला-फ़िशाँहै
बचपनमेंतोहरगामपेइकसब्ज़-परीथी
सदियोंसेहैजलतेहुएटापूकीअमानत
वोवादी-ए-गुल-रंगजोख़्वाबोंमेंपलीथी
जलतेहुएकोहसारपेइकशोख़गिलहरी
मुँहमोड़केगुलशनसेब-सदनाज़खड़ीथी
नेज़ेकीअनीथीरग-ए-अनफ़ासमेंरक़्साँ
वोताज़ाहवाओंमेंथाखिड़कीभीखुलीथी
हमपीभीगएऔरसलामतभीहैं'अंबर'
पानीकीहरइकबूँदमेंहीरेकीकनीथी
  - Ambar Bahraichi
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