gum unhin main hooñ un ka dhyaan kab nahin aata | गुम उन्हीं मैं हूँ उन का ध्यान कब नहीं आता

  - Ali Manzoor Hyderabadi
गुमउन्हींमैंहूँउनकाध्यानकबनहींआता
यादउन्हेंभुलानेकाकोईढबनहींआता
ज़ब्त-ए-गिर्याकीतलक़ींख़त्मकरबसहमदम
बातबातपररोनाबे-सबबनहींआता
किसपेजानदेताहूँराज़हीमेंरहनेदे
नामउसदिल-आराकाता-ब-लबनहींआता
क्याकहूँउसेपहलेदेखताथाकिसढबसे
जोहसींनज़रमुझकोआहअबनहींआता
जितनेबादा-ख़्वारआएतालिब-ए-नशातआए
साक़ियाकोईमुझसाहक़तलबनहींआता
इतनेग़मगुसारोंसेशादक्याहोवोग़मगीं
ग़मभीजिसकेहिस्सेमेंसबकासबनहींआता
तेरीकम-निगाहीकातलबखींचलाताहै
सामनेतिरेमैंख़ुदबे-सबबनहींआता
रश्क-ए-ग़ैर'मंज़ूर'ऐसेवक़्तआताहै
दोस्तकेतसव्वुरमेंदोस्तजबनहींआता
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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