husn ko samajhta hai ishq ham-zabaan apna | हुस्न को समझता है इश्क़ हम-ज़बाँ अपना

  - Ali Manzoor Hyderabadi
हुस्नकोसमझताहैइश्क़हम-ज़बाँअपना
हैहक़ीक़तऐसीहीयाहैयेगुमाँअपना
फ़ाशहमकरेंक्यूँँकरराज़-ए-मुद्दआ'-याबी
गुमहुसूल-ए-मक़्सदमेंहासिल-ए-बयाँअपना
कारसाज़हैकितनीदीद-ओ-बाज़-दीदअपनी
मिलगयासिलाहमकोबा'द-ए-इम्तिहाँअपना
लुत्फ़-ए-रंजिश-ए-बेजाआजदोनोंपातेहैं
मुस्कुरारहेहैंवोदिलहैशादमाँअपना
उनकीदिल-फ़रेबीकायेजवाबहैवर्ना
मुझसाबद-गुमाँसमझेउनकोमेहरबाँअपना
कारवाँकेभीमिलतेकुछनिशाँयेना-मुम्किन
कुछअसरतोछोड़ेगीयाद-ए-कारवाँअपना
दर्द-आश्नादिलकोदेखकरमैंकहताहूँ
यासदेनहींसकतीआसकोमकाँअपना
बेकसीकीमंज़िलसेजिसकीहदनहींमिलती
इसज़मींपेखींचेंहमकिसतरहनिशाँअपना
क्याइलाजहै'मंज़ूर'इसजुनूँ-ख़िरामीका
मुन्फ़इलहूँमजनूँकोकहकेहम-इनाँअपना
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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