poochho na kuchh suboot-e-khird main ne kya diya | पूछो न कुछ सुबूत-ए-ख़िरद मैं ने क्या दिया

  - Ali Manzoor Hyderabadi
पूछोकुछसुबूत-ए-ख़िरदमैंनेक्यादिया
एकमस्त-ए-नाज़कोदिल-ए-बे-मुद्दआदिया
अबक्यागिलाकरूँँअदम-ए-इल्तिफ़ातका
मेरीनिगाह-ए-यासनेसबकुछजतादिया
बढ़तेहुएशुऊ'रमेंगुमहोरहाहूँमैं
एहसास-ए-हुस्नआपनेइतनाबढ़ादिया
देखीजबतजल्ली-ए-तकरार-आश्ना
बे-रंगियोंकारंगख़ुदीनेजमादिया
हैशादबे-दिलीपेतही-दस्त-ए-आरज़ू
अच्छाकियानिशान-ए-तमन्नामिटादिया
मायूस-ए-जल्वा-हा-ए-तरबहूँख़बरनहीं
दिलख़ुदहीबुझगयाकिकिसीनेबुझादिया
क्यालुत्फ़-ए-इज़्तिराबदिखाऊँकिआपने
एहसास-ए-दर्ददर्दसेपहलेमिटादिया
अंजाम-ए-दीद-ओ-ईदअबहम-नशींपूछ
वोमुझकोयादहैमुझेजिसनेभुलादिया
मा'लूमथातुझेकिवोदर्द-आश्नानहीं
'मंज़ूर'दिलकादर्दउन्हेंभीसुनादिया
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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