barham-kun-e-dil yuñ k | बरहम-कुन-ए-दिल यूँँ कभी बरहम न हुआ था

  - Ali Manzoor Hyderabadi
बरहम-कुन-ए-दिलयूँँकभीबरहमहुआथा
हैरत-असरऐसामिराआलमहुआथा
उनशोख़निगाहोंनेतड़पऔरबढ़ादी
अल्लाहअभीदर्द-ए-जिगरकमहुआथा
अबभीमुझेख़ुद्दारी-ए-जानाँमेंनहींशक
पहलेभीमिरादिलमुतवह्हमहुआथा
पीर-ए-मुग़ाँउसकीबक़ामेंमुझेशकहै
वाक़िफ़असर-ए-जामसेक्याजमहुआथा
वोशोख़मुझेदेखकेयूँँशर्मसेझुकजाए
जिसकासर-ए-मग़रूरकभीख़महुआथा
इसकम-निगहीनेतोमुझेमारहीडाला
ऐसाअसरपुर्सिश-ए-पैहमहुआथा
मशहूरवो'मंज़ूर'हैजिसकेलिएकलतक
सरमा-ए-शोहरतहीफ़राहमहुआथा
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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