farq jab lazzat-e-ehsaas men paaya na gaya | फ़र्क़ जब लज़्ज़त-ए-एहसास में पाया न गया

  - Ali Manzoor Hyderabadi
फ़र्क़जबलज़्ज़त-ए-एहसासमेंपायागया
दर्ददेखागयातुमकोदिखायागया
चुटकियाँकौनयेरहरहकेलिएजाताहै
मेरेदिलमेंतोमिरीजाँकोईआयागया
लुत्फ़यूँँरंजिश-ए-बे-जाकेलिएपहरोंतक
बे-सबबरूठनेवालेकोमनायागया
ख़्वाब-ए-पुर-कैफ़कामंज़रभीनशात-आवरथा
दोस्तकोइसलिएकुछदेरजगायागया
मनअ'करतीजोरहीख़ंदा-जबीनीउसकी
दर्द-ए-दिलअपनाकभीउसकोसुनायागया
ख़ुदहँसावोयेजवानीकीकरम-बख़्शीहै
ख़ुसरव-ए-हुस्नकोमुझसेतोहँसायागया
देतोदीज़ब्त-ए-मोहब्बतकीक़समज़ालिमने
फ़ाएदाज़ब्त-ए-मोहब्बतकाबतायागया
कबदिखाताहैवोबर्बादी-ए-हसरतकासमाँ
ख़ाकमेंजबमिरीहसरतकोमिलायागया
रौशनीजिसकीदिखातीथीमुझेभूलहीभूल
उसक़मर-वशकावोअंदाज़भुलायागया
तूरकीपूरीतरहयाददिलाईगई
होशछीनेतोगएहोशमेंलायागया
उनकीमश्कूकनज़रमेंवोमज़ाथामंज़ूर
कियक़ींअपनीमोहब्बतकादिलायागया
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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