laayegi rang aap ki ye dil-lagi kuchh aur | लाएगी रंग आप की ये दिल-लगी कुछ और

  - Ali Manzoor Hyderabadi
लाएगीरंगआपकीयेदिल-लगीकुछऔर
बढ़कररहेगीअबमिरीआशुफ़्तगीकुछऔर
मुझपरखुलेंगेऔरअभीराज़-हा-ए-इश्क़
दिलकोमिलेगीलज़्ज़त-ए-बेचारगीकुछऔर
मेरीहयातइश्क़हैतम्हीद-ए-इम्बिसात
जल्वेदिखाएगीमुझेख़ुद-रफ़्तगीकुछऔर
उनकीतरफ़हैचश्म-ए-सुख़नगोदम-ए-अख़ीर
उसकेसिवानहींअसर-ए-ज़िंदगीकुछऔर
हाँख़याल-ए-दोस्तदिखादोस्तकोदिखा
बाक़ीकुछऔरहैहवस-ए-बंदगीकुछऔर
रहताइतनादूरमैंउसजल्वा-गाहसे
काशउभारताग़म-ए-उफ़्तादगीकुछऔर
वा'देयूँँहीजोकरतेरहेंगेवोनौ-ब-नौ
हासिलकरूँँगामैंतरब-ए-ज़िंदगीकुछऔर
'मंज़ूर'इकनिगाह-ए-तरब-सोज़केसिवा
देखाहमनेहासिल-ए-शर्मिंदगीकुछऔर
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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