naaz-e-but-e-mahvash par qurbaan dil-o-jaan hai | नाज़-ए-बुत-ए-महवश पर क़ुर्बान दिल-ओ-जाँ है

  - Ali Manzoor Hyderabadi
नाज़-ए-बुत-ए-महवशपरक़ुर्बानदिल-ओ-जाँहै
येशान-ए-ख़ुदाशाहिद-ए-ग़ारत-गर-ए-ईमाँहै
जोबातभीहैप्यारीजोचालभीहैअच्छी
आनउसकीनहींमख़्फ़ीशानउसकीनुमायाँहै
हमराहचलूँउसकेकुछबातकरूँँउससे
मुद्दतसेयेहसरतहैमुद्दतसेयेअरमाँहै
वोमुझकोदिखातेहैंहरआननयाजल्वा
मेरेलिएहरजल्वासरमाया-ए-एहसाँहै
गिर्दाब-ए-हवादिसमेंख़ुशहूँकिमिरीकश्ती
ना-दीदा-ए-साहिलहैपरवर्दा-ए-तूफ़ाँहै
हँसताहुआआयाहैहँसहँसकेरुलाएगा
वोअहद-शिकनफिरअबआमादा-ए-पैमांँहै
'मंज़ूर'उसेदिलदेनादिलदेकेख़लिशलेना
येभीकोईहसरतहैयेभीकोईअरमाँहै
  - Ali Manzoor Hyderabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy