ishq-e-saadik jo aseer-e-tamaa-e-khaam na tha | इश्क़-ए-सादिक़ जो असीर-ए-तमा-ए-ख़ाम न था

  - Ali Manzoor Hyderabadi
इश्क़-ए-सादिक़जोअसीर-ए-तमा-ए-ख़ामथा
सई-ए-नाकामकेग़मसेमुझेकुछकामथा
तूरकेलुत्फ़-ए-ख़ुसूसीकीक़समपहलेभी
मेरेदिलपरअसर-ए-जल्वा-गह-ए-आमथा
दोस्तकेहुस्न-ए-तवज्जोहसेनहींशादाबतक
निगह-ए-ग़म-ज़दामेंक्याकोईपैग़ामथा
हसरत-ए-ख़ूँ-शुदाहरआननईशानमेंथी
रंगजोसुब्हकोदेखावोसर-ए-शामथा
दिल-लगीहमसेकिएजातेहैंक्यूँँऐशपसंद
क्यायहाँसोख़्ताकामोंकाकोईकामथा
जानताथाजिसेअपनीउसीमहफ़िलमेंगया
जाकेग़ैरोंकीतरहमुंतज़िर-ए-जामथा
मय-गुसारीकेलिएमिलगएहम-ज़ौक़बहुत
ग़म-गुसारीकेलिएकोईभीहम-कामथा
इसज़मानेमेंभीइल्हामहै'मंज़ूर'काशे'र
मैंकिसीदौरमेंहसरत-कश-ए-इल्हामथा
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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