jis ke eemaan par but-e-kaafar hañse | जिस के ईमाँ पर बुत-ए-काफ़र हँसे

  - Ali Manzoor Hyderabadi
जिसकेईमाँपरबुत-ए-काफ़रहँसे
अल्लाहअल्लाहवोहँसेक्यूँँकरहँसे
हुस्न-ए-माह-ओ-माहवशसेहर-आफ़रीं
हाएजादूगरपेजादूगरहँसे
क़ुलक़ुल-ए-मीनादिखाएजबअसर
मैंहँसूँसाक़ीहँसेसाग़रहँसे
क्यूँँकरआतीहैहँसीकिसकोख़बर
उनपेमैंहैराँहूँजोमुझपरहँसे
इकपतेकीबातकहताहूँसुनो
कोईहँसकररोएयारोकरहँसे
इकपताकीबातकहताहूँसुनो
कोईहँसकररोएयारोकरहँसे
फब्तियाँकहनेपेमैंआऊँअगर
वाइ'ज़-ए-ज़ीशाँसर-ए-मिंबरहँसे
क्याख़बर'मंज़ूर'हैकिसध्यानमें
वोतोवोज़ाहिदफ़रिश्तोंपरहँसे
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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