समझेथे'मीर'हमकियेनासूरकमहुआ
फिरउनदिनोंमैंदीदा-ए-ख़ूँ-बारनमहुआ
आएब-रंग-ए-अब्रअरक़-नाकतुमउधर
हैरानहूँकिआजकिधरकोकरमहुआ
तुझबिनशराबपीकेमूएसबतिरेख़राब
साक़ीबग़ैरतेरेउन्हेंजाम-ए-समहुआ
काफ़िरहमारेदिलकीनपूछअपनेइश्क़में
बैत-उल-हरामथासोवोबैतुस-सनमहुआ
ख़ाना-ख़राबकिसकाकियातेरीचश्मने
थाकौनयूँँजिसेतूनसीबएकदमहुआ
तलवारकिसकेख़ूनमेंसरडूबहैतिरी
येकिसअजल-रसीदाकेघरपरसितमहुआ
आईनज़रजोगोरसुलैमाँकीएकरोज़
कूचेपरउसमज़ारकेथायेरक़महुआ
का-ए-सर-कशाँजहानमेंखींचाथामेंभीसर
पायान-ए-कारमोरकीख़ाक-ए-क़दमहुआ
अफ़्सोसकीभीचश्मथीउनसेख़िलाफ़-ए-अक़्ल
बार-ए-इलाक़ासेतोअबसपुश्त-ए-ख़महुआ
अहल-ए-जहाँहैंसारेतिरेजीते-जीतलक
पूछेंगेभीनबातजहाँतोअदमहुआ
क्याक्याअज़ीज़दोस्तमिले'मीर'ख़ाकमें
नादानयाँकसोकाकसोकोभीग़महुआ