ai kashmakash-e-ulfat jee sakht pareshaan hai | ऐ कश्मकश-ए-उल्फ़त जी सख़्त परेशाँ है

  - Ali Manzoor Hyderabadi
कश्मकश-ए-उल्फ़तजीसख़्तपरेशाँहै
मरनेकीभीहसरतहैजीनेकाकाभीअरमाँहै
साहिलसेनहींलगतीग़र्क़ाबनहींहोती
कश्तीहैथपेड़ोंमेंयेभीकोईतूफ़ाँहै
मैंक्यामिरीउल्फ़तक्यातूऔरमुझेपूछे
बससितम-आराबसहसरतहैअरमाँहै
येमौज-ए-तबस्सुमक्याज़ालिमइसेधोदेगी
जोरंग-ए-पशेमानीचेहरासेनुमायाँहै
मग़रूर-ए-मोहब्बतहूँख़ुदमेरीनिगाहोंमें
येबे-सर-ओ-सामानीराज़-ए-सर-ओ-सामाँहै
इसहुस्न-ए-मुजस्समकीशर्मीलीअदाओंका
एहसास-ए-मोहब्बतभीशर्मिंदा-ए-एहसाँहै
'मंज़ूर'उसेरुख़्सतकिसदिलसेकरूँँगामैं
धड़काहैयहीहरदमजबसेकिवोमेहमाँहै
  - Ali Manzoor Hyderabadi
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