hai KHamosh aañsuon men bhi nashaat-e-kaamraani | है ख़मोश आँसुओं में भी नशात-ए-कामरानी

  - Ali Jawwad Zaidi
हैख़मोशआँसुओंमेंभीनशात-ए-कामरानी
कोईसुनरहाहैशायदमिरीदुखभरीकहानी
यहीथरथरातेआँसूयहीनीचीनीचीनज़रें
यहीउनकीभीनिशानीयहीअपनीभीनिशानी
येनिज़ाम-ए-बज़्म-ए-साक़ीकहींरहसकेगाबाक़ी
किख़ुशीतोचंदलम्हेग़मदर्दजावेदानी
हैंवजूद-ए-शयमेंपिन्हाँअज़लअबदकेरिश्ते
यहाँकुछनहींदोरोज़ाकोईशयनहींहैफ़ानी
तिरीबातक्याहैवाइज़मिरादिलवोहैकिजिसने
इसीमय-कदेमेंअक्सरमिरीबातभीमानी
पय-ए-रफ़-ए-बद-गुमानीमैंवफ़ाबरतरहाथा
मिरीपय-ब-पयवफ़ासेबढ़ीऔरबद-गुमानी
मिरामय-कदासलामतकिहरएकक़ैदउठादी
तोदैरकीग़ुलामीहरमकीपासबानी
करूँँउनसेलाखशिकवेमगरउनसेशिकवाकरना
तरीक़ा-ए-मोहब्बतरिवायत-ए-जवानी
  - Ali Jawwad Zaidi
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