hareem-e-dil ki sar-b-sar jo raushni se bhar gaya | हरीम-ए-दिल, कि सर-ब-सर जो रौशनी से भर गया

  - Ali Akbar Natiq
हरीम-ए-दिल,किसर-ब-सरजोरौशनीसेभरगया
किसेख़बर,मैंकिनदियोंकीराहसेगुज़रगया
ग़ुबार-ए-शहरमेंउसेढूँडजोख़िज़ाँकीशब
हवाकीराहसेमिला,हवाकीराहपरगया
तिरेनवाहमेंरहामगरमियान-ए-दीन-ओ-दिल
गजरबजातोजीउठा,सुनीअज़ाँतोमरगया
सफ़ेदपत्थरोंकेघर,घरोंमेंतीरगीकेग़म
हज़ारग़मकाएकयेकितूभीबे-ख़बरगया
नगरहैंआफ़्ताबके,बरहनागुम्बदोंकेसर
सरोंपेनूरकेकलस,मैंनूरमेंउतरगया
  - Ali Akbar Natiq
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