din ka samay hai chauk kuein ka aur baankon ke jaal | दिन का समय है, चौक कुएँ का और बाँकों के जाल

  - Ali Akbar Natiq
दिनकासमयहै,चौककुएँकाऔरबाँकोंकेजाल
ऐसेमेंनारीतूनेचलीफिरतीतरीवालीचाल
जामुनोंवालेदेसकेलड़के,टेढ़ेउनकेतौर
पँखटटोलेंतूतियोंकेवो,फिरकरहरहरडाल
वोशख़्सअमरहै,जोपीवेगादोचाँदोंकेनूर
उसकीआँखेंसदागुलाबीजोदेखेइकलाल
शामकीठंडीरुतनेभरेहैंआब-ए-हयातसेनैन
मोंगरोंवालेबाग़नेओढ़ीगहरीकासनीशाल
  - Ali Akbar Natiq
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